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Contact Supplierसोनाली मुर्गियाँ (Sonali Chicks) भारत और बांग्लादेश में अंडे और मांस दोनों के लिए बहुत लोकप्रिय हैं। यह नस्ल विशेष रूप से कम लागत में अधिक लाभ देने के लिए जानी जाती है।
यहाँ सोनाली मुर्गियों के बारे में मुख्य जानकारी दी गई है:
1. सोनाली मुर्गी क्या है?
यह एक क्रॉस-ब्रीड (मिश्रित नस्ल) है, जिसे रोड आइलैंड रेड (RIR) नर और फयौमी (Fayoumi) मादा के मेल से तैयार किया गया है। दिखने में यह बिल्कुल देसी मुर्गी जैसी लगती है, इसलिए बाजार में इसकी मांग बहुत अधिक रहती है।
2. मुख्य विशेषताएँ
* दिखावट: इनका रंग सुनहरा (Golden) और भूरा होता है। इनकी बनावट और व्यवहार पूरी तरह से देसी मुर्गियों जैसा होता है।
* रोग प्रतिरोधक क्षमता: अन्य विदेशी नस्लों (जैसे ब्रायलर) की तुलना में इनमें बीमारियों से लड़ने की शक्ति अधिक होती है।
* अनुकूलन: ये भारत की गर्म और उमस भरी जलवायु में आसानी से रह सकती हैं।
3. पालन के फायदे (Production Benefits)
सोनाली मुर्गियों को पालने के दो मुख्य उद्देश्य होते हैं:
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| अंडा उत्पादन | ये साल में लगभग 180 से 200 अंडे देती हैं। इनका अंडा भी देसी अंडे जैसा दिखता है। |
| मांस उत्पादन | इनका मांस स्वादिष्ट होता है और बाजार में "देसी चिकन" के नाम पर अच्छे दाम में बिकता है। |
| वजन | लगभग 100-120 दिनों में इनका वजन 1.2 से 1.5 किलोग्राम तक हो जाता है। |
4. देखभाल और आहार
* आहार: इन्हें लेयर फीड या ब्रायलर फीड दिया जा सकता है। इसके अलावा, ये घर का बचा खाना, दाना और घास भी आसानी से खा लेती हैं।
* आवास: इन्हें बंद शेड में या खुले मैदान (Free-range) दोनों तरीकों से पाला जा सकता है।
* टीकाकरण (Vaccination): हालाँकि ये मजबूत होती हैं, फिर भी रानीखेत (Ranikhet) और गंबोरो (Gumboro) जैसी बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण जरूरी है।
5. बाजार में मांग
सोनाली मुर्गियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके अंडे और मांस की कीमत ब्रायलर से हमेशा ज्यादा मिलती है। छोटे किसानों और कम बजट में पोल्ट्री फार्मिंग शुरू करने वालों के लिए यह सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है।
Indian Hatchery, Barharwa (जो झारखंड के साहिबगंज जिले में स्थित है) सोनाली और अन्य नस्लों के चूजों (chicks) के लिए एक जानी-मानी जगह है।
यहाँ की कुछ मुख्य बातें जो आपको जाननी चाहिए:
उपलब्ध चूजों की नस्लें
Indian Hatchery आमतौर पर निम्नलिखित नस्लों के चूजे उपलब्ध कराती है:
* सोनाली (Sonali): जिसकी आपने पहले बात की थी।
* कड़कनाथ (Kadaknath): काले मांस वाली मशहूर नस्ल।
* कवेरी / आर.आई.आर (RIR): अंडे के उत्पादन के लिए।
* बॉयलर (Broiler): तेजी से मांस उत्पादन के लिए।
संपर्क कैसे करें?
चूंकि चूजों की उपलब्धता स्टॉक और बुकिंग पर निर्भर करती है, इसलिए जाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें:
* अग्रिम बुकिंग (Advance Booking): सोनाली चूजों की मांग ज्यादा होने के कारण अक्सर 10-15 दिन पहले बुकिंग करनी पड़ती है।
* लोकेशन: यह बरहरवा रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्र में स्थित है, जहाँ से परिवहन (Transportation) की अच्छी सुविधा मिल जाती है।
* रेट: चूजों का रेट हर हफ्ते बदलता रहता है, इसलिए मौजूदा कीमत फोन पर या वहां जाकर ही पता करें।
आपको क्या करना चाहिए?
* सीधे विजिट करें: यदि आप बरहरवा या आसपास के जिले (जैसे पाकुड़, साहिबगंज या मालदा) से हैं, तो सीधे जाकर हैचरी देखना सबसे अच्छा है। इससे आप चूजों की क्वालिटी और स्वास्थ्य खुद देख पाएंगे।
* वैक्सीनेशन की जानकारी लें: चूजे खरीदते समय हमेशा पूछें कि उन्हें 'जीरो डे' (Day 0) की वैक्सीन (जैसे मरेक्स) दी गई है या नहीं।